गणेश चतुर्थी 2025: महत्व, इतिहास और पूजन विधि

प्रस्तावना
भारत विविधताओं और त्योहारों की भूमि है। यहाँ हर पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। इन्हीं प्रमुख त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी। यह पर्व विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता, बुद्धि और ज्ञान के देवता भगवान गणेश की आराधना का दिन है।
गणेश चतुर्थी 2025 का उत्सव 27 अगस्त को पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन घरों और पंडालों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है और 10 दिनों तक श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।
🕉 गणेश चतुर्थी
-
गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी सभी बाधाओं को दूर करने वाले।
-
उन्हें विद्या, बुद्धि और समृद्धि का देवता माना जाता है।
-
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणपति पूजा से होती है।
-
माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है।
📜 गणेश चतुर्थी का इतिहास और उत्पत्ति
इस पर्व की शुरुआत मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से मानी जाती है।
बाद में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में इस त्योहार को सार्वजनिक रूप से मनाना शुरू किया।
उनका उद्देश्य था कि गणेश उत्सव के जरिए समाज को एकजुट किया जाए और ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की भावना जगाई जाए।
तब से यह पर्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया।
🌺 गणेश चतुर्थी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
-
तिथि: 27 अगस्त 2025 (बुधवार)
-
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: सुबह 11:05 बजे, 27 अगस्त
-
चतुर्थी तिथि समाप्त: सुबह 09:40 बजे, 28 अगस्त
-
पूजन का श्रेष्ठ समय (मध्यान्ह मुहूर्त): 11:20 AM – 01:50 PM
🪔 गणेश चतुर्थी की पूजा विधि
1. प्रतिमा स्थापना
-
सबसे पहले घर या पंडाल में स्वच्छ स्थान पर पीली या लाल चादर बिछाएँ।
-
गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें।
2. संकल्प और आह्वान
-
कलश स्थापित करें।
-
दीपक जलाएँ और गणेश जी को जल, अक्षत, दुर्वा और फूल अर्पित करें।
3. मंत्र जाप
-
“ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जप करें।
-
गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा का पाठ करें।
4. भोग और प्रसाद
-
मोदक, लड्डू और नारियल गणेश जी का प्रिय भोग है।
-
प्रसाद सबमें बांटें।
5. आरती
-
गणेश जी की आरती करें और परिवार सहित भक्ति में लीन हों।
🎉 गणेश उत्सव का सांस्कृतिक महत्व
-
महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में यह पर्व सबसे भव्य रूप से मनाया जाता है।
-
जगह-जगह पंडाल सजाए जाते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, भक्ति संगीत और नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं।
-
10वें दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है और गूंजती है आवाज –
“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!”
🌱 पर्यावरण के प्रति जागरूकता
हाल के वर्षों में गणेश उत्सव को Eco-Friendly बनाने की ओर ध्यान दिया जा रहा है।
-
मिट्टी की प्रतिमा का उपयोग करें।
-
प्राकृतिक रंग और सजावट अपनाएँ।
-
विसर्जन के लिए घर में बाल्टी या कृत्रिम तालाब का प्रयोग करें।
इससे प्रकृति और जलस्रोत सुरक्षित रहते हैं।
माँ काली के 9 शक्तिशाली रूप – जानें देवी के अद्भुत और रहस्यमयी स्वरूप
नवरात्रि के नौ दिन – जानिए माँ दुर्गा के 9 शक्तिशाली रूपों के नाम और उनका महत्व
भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतार – धरती पर धर्म की रक्षा के लिए अवतरण